Friday, 26 August 2016

HAPPINESS

*HAPPINESS IS GOD’S MEDICINE TO HEAL YOUR LIFE*
*Message From The Universe For You*

Happiness is your natural state. It is your inner nature that has been gifted to you from birth.

*Happiness* is not just a state of mind, but it is the true elixir of life.

A happier heart can heal a dying body, but a broken spirit can vanish life from even a healthy body.

*HAPPINESS IS THE TRUE MEDICINE CREATED BY GOD.*

Everything in this Universe works with the law of attraction. *The law of attraction* is what you focus and feel the most you attract the most.

The happier you feel, the more success and abundance you will achieve.

The more happiness you cultivate, the more magic you will experience in life.

On the quest to dream, most people live in an illusion. The illusion is delaying their happiness. 

You want to be happy after becoming successful, making more money and having good health.
But, the Universe works in the reverse direction.

When you become happy, you can achieve more success, more money and better health.

Happiness is your medicine to every illness you have in your mind, body and soul.

Are you suffering in any area of life and that it seems impossible to feel happy?

Then start *practicing GRATEFULNESS.*

Yes, GRATEFULNESS is the starting point of your happy life.

No matter where you are living or how broken your life is, you can always find at least one thing to become grateful. If you can find one thing to be grateful, then you can find even ten things. Once you start counting your blessings your life will change magically.

Your sole purpose in life is to feel more and more happy in every moment of life. Once you start being happy everything will fall into place.

As a human, you have the gift to become happy because happiness is God’s medicine to heal your life.

Whenever you become clueless to find *HAPPINESS* find one thing to be grateful for. And then one more and then one more and the list will take care of the rest.

Don’t wait for your dreams to come true to become happy but start becoming happy to make all your dreams come true.

Always remember, Happiness is God’s medicine for every struggle of your life.

*The Universe*





Friday, 20 May 2016

भक्ति --- एक शून्य अवस्था

               भक्ति  --- एक शून्य अवस्था
भक्ति ईश्वर के प्रति तीव्र प्रेम है | ईश्वर प्रेम है और ईश्वर से प्रेम करना उसके लिए जो वह है - भक्ति होती है | भक्ति की कोई दशा नहीं होती है | हमें ईश्वर से कोई शर्त या मांग नहीं करनी चाहिए कि वह हमारी इच्छाओं की पूर्ती उसी तरह करे जिस तरह हम उन्हें पाना चाहते है, अन्यथा हम उसके प्रति सम्मान या प्रेम नहीं रखेंगे।
          भक्ति एक पवित्र भावना होती है | यह विशिष्ट होती है | यह उच्च स्तर की चेतना की ओर भक्त को उन्नत करती है | प्रबल भक्ति सर्वोच्च से स्वयं को समाहित करने की दशा होती है | भक्त उन सब से जुड़ जाता है | जो उसके पास होता है और अपनी आराधना की वस्तु जैसे ईश्वर के लिए कार्य करता है | जीवन में प्रत्येक कार्य उसके प्रिय ईश्वर से जुड़ा होता है | उसके जीवन का सबकुछ एक आराधना और पूजा ईश्वर के प्रति होती है | जब मस्तिष्क स्थिरता पूर्वक एवं लगातार ईश्वर पर केन्द्रित होता है - वह ईश्वर से एकाकार हो जाता है |
    भक्ति विश्वास से आरम्भ होती है | हमें प्रक्रति एवं संसार के आश्चर्य के बारे में सिखाया जाता है और इसलिए हम यह विश्वास रखते हैं कि ईश्वर अच्छा होता है | जैसे ही हम प्रक्रति एवं जीवन के चमत्कारों एवं आश्चर्यों से और अधिक ज्ञान अर्जित करते हैं हमारा विश्वास ईश्वर के प्रति आकर्षित करता है | हम उसकी क्ष्रमताओं के बारे में मंथन करते हैं और उपहार जो वह हम पर बरसाता है और हम उसके प्रति आकर्षित होते हैं |  हम स्वयं को ईश्वर से जुड़ा पाते हैं और हम उससे सर्वोच्च प्रेम से प्यार करते हैं
भक्त और भक्ति                                                                  
भक्त   शब्द अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग मायने रखता है। मंदिरों के दर्शनार्थियों से लेकर घरों में पूजा-आरती और अन्य रीति-रिवाजों का पालन करने वालों को आमतौर पर भक्त कहा जाता है। हो सकता है कि एक भक्त का बाहरी रूप इनमें से किसी तरह का हो, लेकिन एक भक्त की मूल प्रकृति क्या होती है?
भक्त होने का अर्थ किसी चीज की कल्पना करना नहीं है। भक्त होने का मतलब है, आप समझ चुके हैं कि आपके विचार, आपकी कल्पना, आपकी याद्दाश्त इस जगत में किसी काम की नहीं। भक्त होने का मतलब किसी मतिभ्रम का शिकार होना भी नहीं हैशिक्षा का मतलब सर्टिफिकेट हासिल करना नहीं है। इसका मतलब खुद का विकास करना है।
जब मैं भक्ति कहता हूं तो मैं ईश्वर के बारे में बात नहीं कर रहा हूं। मैं आपके शून्य हो जाने के बारे में बात कर रहा हूं। अगर आप शून्य की अवस्था में आ जाते हैं तो आप हर चीज को अपने भीतर समा सकते हैं, क्योंकि हर चीज शून्य में समा सकती है।
भक्त होने का मतलब किसी मतिभ्रम का शिकार होना भी नहीं है। भक्त होने का मतलब है कि वह अपने खुद के विचारों को, अपनी भावनाओं को कोई महत्व नहीं देता, क्योंकि वह जानता है कि वह कुछ भी नहीं है। वह किसी काम का नहीं है।इस जगत में हर चीज शून्य में ही समाई हुई है। जब आप शून्य हो जाते हैं तो आप हर चीज को अपने भीतर समा सकते हैं। तो भक्ति का अर्थ बस यही है।
यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हमने एक ऐसे समाज का निर्माण किया है जहां विचार को ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। देखा जाए तो यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है। विचार तो बहुत छोटी सी घटना है। विचार तो आपकी एकत्र की हुई स्मृति से ही लगातार अपना भोजन ले रहे होते हैं। और जो कुछ भी आपने एकत्र किया है, वह चाहे जितना भी बड़ा हो, भले ही पूरा विश्व ज्ञान कोष अपने दिमाग में इकठ्ठा कर लिया हो, फिर भी यह बहुत छोटा है और आपके सभी विचार उस क्षुद्रता से आ रहे हैं जिसे आप ज्ञान कहते हैं।
भक्ति बस एक सहज बोध है
एक भक्त को बेशक किसी चीज को अलंकृत करना नहीं आता हो, लेकिन वह जानता है कि वह क्या है और यही जानना उसके लिए काफी है। चूंकि वह जानता है कि वह क्या है इसीलिए वह इतना खूबसूरत इंसान बन गया है, इतना जबर्दस्त आनंदमय प्राणी बन गया है, उसे अपने भीतर संगीत महसूस होता है, शानदार नृत्य महसूस होता है, क्योंकि उसके पास जीवन का बोध है, अहसास है। उसे इसे समझने की परवाह नहीं, क्योंकि वह इसकी विशालता को देख लेता है। वह अपने अस्तित्व की तुच्छ प्रकृति को भी देखता है। उसने इसे स्पर्श किया है, इसीलिए वह इतना पवित्र और भाग्यवान नजर आता है, इसलिए नहीं कि उसने सब कुछ जान लिया है। वह जानने की ज्यादा चिंता नहीं करता, क्योंकि वह भक्त है।
भक्ति और नम्रता
नम्रता भक्ति के लिए बहुत आवश्यक है।
सबमे प्रभु हैं ये बात संतो के श्री मुख से उपदेश सुन-सुनकर जब ह्रदय में बैठ जायेगी तब किसी के प्रति कठोरता हम कर ही नहीं पाएंगे। प्रभु को सहजता, सरलता, निर्मलता और नम्रता विशेष प्रिय है।नम्र और विनम्र व्यक्ति के प्रति तो दुनिया में भी सब सदभाव रखते हैं। व्यक्ति जितना गुणवान होगा उतना ही विनम्रवान भी होगा। ज्ञान सरलता की ओर ही ले जाता है। जो अकड़ पैदा करे वो तोअज्ञान है। नम्रता एक ऐसा दुर्लभ गुण है , जिसे हमें अपने जीवन में धारण करना है। नम्रता का अर्थ ऐसे भाव से जीना है कि हम सब एक ही परमात्मा की संतान हैं। जब हमें यह अहसास होता है कि प्रभु की नजरों में सब एक समान हैं , तो दूसरों के प्रति हमारा व्यवहार नम्र हो जाता है। जब हमारा अहंकार खत्म हो जाता है तो हमारा घमंड और गर्व मिट जाता है। तब हम किसी को पीड़ा नहीं पहुंचाते। हम महसूस करते हैं कि प्रभु की दया से हमें कुछ उपहार मिले हैं और जो पदार्थ हमें दूसरों से अलग करते हैं , वे भी प्रभु के दिए उपहार हैं। अपने भीतर प्रभु का प्रेम अनुभव करने से हमारे अंदर नम्रता आती है। तब हर चीज में हमें प्रभु का हाथ नजर आता है। हम देखते हैं कि करनहार तो प्रभु हैं। इस तरह की आत्मिक नम्रता धारण करने से , धन , मान , प्रतिष्ठा , ज्ञान और सत्ता का अहंकार हमें सताता नहीं है। कहा जाता है कि जहां प्रेम है , वहां नम्रता है। हम जिनसे प्यार करते हैं , उन पर अपना रोब नहीं डालते और न ही उन पर क्रोध करते हैं। हमें उन लोगों के प्रति भी इसी तरह का व्यवहार करना चाहिए , जिनसे हम अपरिचित हैं। यह भी कहा जाता है कि जहां प्यार है , वहां नि : स्वार्थ सेवा का भाव होता है। हम जिनसे प्रेम करते हैं , उनकी सहायता करते हैं। क्योंकि सब में प्रभु की ज्योति निवास करती है।
भक्ति और सेवा       
     
  भक्ति शब्दों की रूप रचना भी उसके गहन और व्यापक स्वरूप को प्रकट करती है। भज्‌-सेवायाम्‌ धातु से क्तिन्‌ प्रत्यय होकर भक्ति शब्द बना है। मूल अर्थ है सेवा, सेवा का संबंध कर्म से है। मन में प्रेमाभक्ति हो तो कर्म में सेवाभक्ति की भावना स्वयं जाग जाएगी। मन प्रभु के नाम को जपता है तो तन सेवा भक्ति, कर्म में रत हो जाता है। चिंतन, मनन, भजन में सेवा नहीं रह सकती। सेवा का संबंध उन कर्मों से है जो अपने प्रिय प्रभु के लिए किए जाते हैं। कर्म करो और भगवान को अर्पित कर दो, अर्थात्‌ प्रत्येक कार्य को करते हुए मन में भावना बननी चाहिए कि मैं जो कर रहा हूं वह सब मेरे भगवान की सेवा भक्ति के निमित्त है।
सेवा संबंधी प्रत्येक कर्म को भगवान को समर्पित करने से प्राणी अहंकार से मुक्त हो जाता है। जो कुछ है उसका है, जो उसका है उसको समर्पित करो।
        ध्यान गुरु अर्चना दीदी कहती हैं
            सेवा का फ़ल: गुरू की कृपा       
                
सेवा मे बहुत आनंद है। सेवा का दूसरा नाम है हनुमान 🌹🌹।
हनुमान जी ने सेवा करके ही तो पाया अपने राम को। हनुमान जी के अतिरिक्त सेवा का दुसरा पर्याय संसार मे हो नही सकता। सेवा का अभिप्राय एक ही शब्द है हनुमान। हनुमान जी का रूप क्या है। हनु कहते है मारने को और मान का मतलब मान ,जिन्होने अपने मन को मार दिया हो। जो अपने मान को मार के सेवा मे लग गये हो वही तो सच्चा सेवक होते है।मन प्रभु के नाम को जपता है तो तन सेवा भक्ति, कर्म में रत हो जाता है। चिंतन, मनन, भजन में सेवा नहीं रह सकती। सेवा का संबंध उन कर्मों से है जो अपने प्रिय प्रभु के लिए किए जाते हैं। कर्म करो और भगवान को अर्पित कर दो, अर्थात्‌ प्रत्येक कार्य को करते हुए मन में भावना बननी चाहिए कि मैं जो कर रहा हूं वह सब मेरे भगवान की सेवा भक्ति के निमित्त है ।
भक्ति और श्रेष्ठता 
                            
हममें से हर एक के भीतर एक राजा है , हर एक व्यक्ति महत्वपूर्ण है और हम सबके भीतर आत्मा है जो कि परमात्मा का अंश है। जब हम इस दृष्टि से अपने सभी कार्य करते हैं कि हमें हर व्यक्ति को अपना सर्वश्रेष्ठ देना है , तब हम हर एक के अंदर बैठे परमात्मा को सम्मान देते हैं।
हे प्यारे प्रभु हम अपनी श्रेष्ठता को प्राप्त कर सके!
हे दयालु! हे कृपालु! हे परमेश्वर! हे ज्योतिर्मय! हे ज्ञानस्वरूप!
चरण-शरण में उपस्थित होकर हम आपके बच्चे आपसे प्रार्थना करते हैं!हमारा यह जीवन आपका दिया हुआ एक वरदान है!
श्रेष्ठ से श्रेष्ठ कर्म करने के लिए और जिंदगी की श्रेष्ठता को प्रकट करने के लिए इस संसार के कर्मक्षेत्र में हम लोग आए हैं!
हमारी बुद्धि अपनी श्रेष्टता को उपलब्ध हो! हमारे ह्रदय का प्रेम श्रेष्ठता तक पहुंचे!हमारे कर्म श्रेष्ठता से युक्त हों। हमारी आत्मा ऊंचाई को, महानता को विशेषता को प्राप्त हो सके! हम अपने अंदर के श्रेष्ठ तत्वों को बाहर निकाल सकें!जो कुछ दुनिया में करने के लिए जो क्षमताएं भगवान जी आपने हम को दी उन सभी क्षमताओं के सामर्थ्य का हम पूर्ण प्रयोग कर सकें!
इस जीवन का पूर्ण लाभ ले सकें हमें वो अवसर दीजिए, प्रेरणा और शक्ति दीजिए। हम अपने विकास तक पहुंचे,ऊंचाई तक पहुंचे! हम संसार की उलझनों में, दुखों में उलझ कर न रह जाएं!उनके पार जाएं,अपना उद्धार करें और जो पिछड़ गए हैं उनका भी हाथ पकड़ कर आगे लेकर जा सकें!हे प्यारे प्रभु इतनी कृपा जरूर करना कि हम अपने सतगुरु के बताये मार्ग पर चल सके!हमें आशीर्वाद दें!अपनी भक्ति, अपनी कृपा, अपने आशीर्वाद हमें प्रदान करें!यही विनती है प्रभु!
*ऊँ शान्तिः! शान्तिः!! शान्तिः!!!ॐ!सादर हरि ॐ जी!*




Saturday, 14 May 2016

INDIA A DIVINE LAND

INDIA A DIVINE LAND

  India is famous for its spirituality, religion, philosophy and high contemplation from time immemorial. It's cultural and philosophical ideology has effected the whole world. It is believed that when God decided to incarnate this earth, He chose this land of India for the purpose of divine.
  The mountains, the rivers, and the forests of this holy land stand witness to the presence of divine Siddhas and enlightened souls, on this earth right from time memorial.
  Lord Krishna sang the divine song of "Gita" here only. With the divine fire of "Havans" and divine vibrations of sounds created with holy mantras, this land is vibrating with purity.
  Even today the divine chants of mantras in temples and holy places create sparks of divinity in human heart. We all are living on such divine land and are breathing here but it's our misfortune that we are not aware of divine opportunities in our home land. We need to again get aware of our lifestyle and mindset to take our lives to a high purposeful path. We need to explore and contemplate on the path and philosophy provided to us by our siddhas. Spirituality gives direction to our lives. With meditation and yoga we can become aware of our divine potential and can work towards realising them. 
  Life is short but sooner the best and before the end of this life, we must start our spiritual journey. The journey which teaches us to run but simultaneously  we also should become aware and creative, in all life situations.
  A real spiritual person is one who is aware and is creating positive atmosphere for himself and others.

Friday, 6 May 2016

परम श्रद्धेय अर्चना दीदी ------ एक दिव्य व्यक्तित्व

                                 परम श्रद्धेय  अर्चना दीदी ----------    एक दिव्य व्यक्तित्व 







तेजस्वी मुखकमल , करुणा तथा प्रेम से पूरित नेत्र , होंठोंं पर शिशु सम भोली मुस्कान , अन्तःकरण में पवित्रता तथा सात्विकता का लहराता महासगर वैराग्य तथा ज्ञान की मूर्तिमान्  स्वरूप , ध्यान की अतल गहरााइयों के फलस्वरूप रोम - रोम से फूटता स्वर्णीम  प्रकाश, स्नेहमयी माँ  सम कोमल हृदय की स्वामिनी प्राातः स्मरणीयाा " अर्चना दीदी " मानो उस परम का ही ह्स्ताक्षर हैं | श्वेत परिधान में सुसज्जित श्वेत आत्मा अपनी उपस्थिति  मात्र से वातावरण को जीवंत तथा मधुरतापूर्ण  कर देती है | उनके आभामंडल की दिव्य तरंगों के घेरे मे जो भी व्यक्ति आता है , वह दिव्य आकर्षण की तरंगों से तरंगित हुए बिना नही रह सकता |

" अर्चना दीदी " की शुभाकांंक्षा  है कि जिस पथ की पथिक बनकर उन्होंने अमृतपान किया , उस पथ पर समस्त विश्व अग्रसर हो सके |  प्रत्येक मुख पर मुस्कान के फूल खिलेंं, हर चक्षु  के अश्रुु धुल जाएँँ, हर हृदय की वीणा  पर परम का संगीत गूँँजे, हर दिशा शांति  व प्रेम की सुवास से सुवासित हो जाए, हर जीवन पुष्प की भांति खिल सके, यही उनकी मंगल कामना है |

इसी पवित्र परोपकारी भाव की नीव पर दीदी ने ( CELEBERATING LIFE FOUNDATION  ) का भव्य मंदिर संंस्थापित किया है | दीदी ने मानव समाज की विभिन्न समस्याओंं, मानवीय संबंधो, व्यक्तिगत समस्याओंं तथा मानसिक व शारिरिक रोगों के मूूलभूूत कारणों व निवारण पर गहन चिन्तन मनन किया है | ध्यान साधना की प्राचीन विधियाँ किस प्रकार आज के मनुष्य के तनाव , अशांति , अवसाद तथा अन्यान्य मनोरोगों की चिकित्सा में लाभकारी सिद्ध हो सकती है तथा किस प्रकार व्यक्ति का सर्वागीण विकास हों सकता है , इस स्न्धर्भ  में दीदी ने अनेक नूतन प्रयोग किए तथा अनेक विधियों का अनुसंधान किया | ध्यान , प्राणायाम , योग , विचार , शक्ति आदि विभिन माध्यमोंं से व्यक्ति अपनी प्रत्येक समस्या का समाधान खोज सके, यही दीदी दवा्रा गठित CELEBERATING LIFE FOUNDATION का उद्ध्येश  है |









Thursday, 28 April 2016

मुसकुराते भगवान

गरमी का मौसम था, मैने सोचा काम पे जाने से पहले गन्नेका रस पीकर काम पर जाता हूँ।एक छोटे से गन्ने की रस की दुकान पर गया !!
वह काफी भीड-भाड का इलाका था, वहीं पर काफी छोटी-छोटी फूलो की, पूजा की सामग्री ऐसी और कुछ दुकानें थीं। और सामने ही एक बडा मंदिर भी था , इसलिए उस इलाके में हमेशा भीड रहती है !
मैंने रस का आर्डर दिया , मेरी नजर पास में ही फूलों की दुकान पे गयी , वहीं पर एक तकरीबन 37 वर्षीय सज्जन व्यक्ति ने 500 रूपयों वाले फूलों के हार बनाने का आर्डर दिया , तभी उस व्यक्ति के पिछे से एक 10 वर्षीय गरीब बालक ने आकर हाथ लगाकर उसे रस की पिलाने की गुजारिश की !!

पहले उस व्यक्ति का बच्चे के तरफ ध्यान नहीं था , जब देखा....तब उस व्यक्ति ने उसे अपने से दूर किया और अपना हाथ रूमाल से साफ करते हुए" चल हट ...."कहते हुए भगाने की कोशिश की !!
उस बच्चे ने भूख और प्यास का वास्ता दिया !!
वो भीख नहीं मांग रहा था , लेकिन उस व्यक्ति के दिल में दया नहीं आयी !!
बच्चे की आँखें कुछ भरी और सहमी हुई थी, भूख और प्यास से लाचार दिख रहा था !!
इतने में मेरा आर्डर दिया हुआ रस आ गया !!
मैंने और एक रस का आर्डर दिया उस बच्चे को पास बुलाकर उसे भी रस पीलाया !!
बच्चे ने रस पीया और मेरी तरफ बडे प्यार से देखा और मुस्कुराकर चला गया !!
उस की मुस्कान में मुझे भी खुशी और संतोष हुआ.......लेकिन. ....वह व्यक्ति मेरी तरफ देख रहा था, जैसे कि उसके अहम को चोट लगी हो !!
फिर मेरे करीब आकर कहा"आप जैसे लोग ही इन भिखारियों को सिर चढाते है"मैंने मुस्कराते हुए कहा आपको मंदिर के अंदर इंसान के व्दारा बनाई पत्थर की मूर्ति में ईश्वर नजर आता है, लेकिन ईश्वर द्वारा बनाए इंसान के अंदर ईश्वर नजर नहीं आता है..........मुझे नहीं पता आपके 500 रूपये के हार से आपका मंदिर का भगवान मुस्करायेगा या नहीं, लेकिन मेरे 10 रूपये के चढावे से मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा और मुझे संतुष्टी भी देकर गया है !!





Wednesday, 27 April 2016

ध्यान तनाव मुक्ति का उपाय

                     तनाव ------------- संगत एक अहम वजह

यदि व्यक्ति नकारात्मक विचारों से युक्त, कुविचारों से युक्त, दुर्गुणों से युक्त व्यक्तियों से मित्रता रखता है,  उनके साथ उठना– बैठना पसंद करता है, उनके संग में  अधिकतम समय व्यतीत करता है|  तो ऐसा संग उसे तनाव की स्थिति में  लाकर अवश्य खड़ा कर देता है | दुर्गुणों से युक्त व्यक्ति के भीतर क्रोध, ईर्ष्या, हिंसा, अहंकार आदि की नकारात्मक वृत्तियाँ मन के  विचारों को दूषित कर देती हैं | ऐसे व्यक्तियों का संग भला तनाव के अतिरिक्त क्या दे सकता है | इसके विपरीत सद्गुणों से युक्त व्यक्तियों का संग सद्गुरु के चरणों में  समर्पित उनके  प्यारों का संग --- शांति, आनंद, प्रेम व सद्भावना प्रदान करता है तथा तनाव मुक्ति में सहायक होता है |
हम सभी ने अनुभव किया है कि किसी-किसी व्यक्ति से मिलकर, बात करके मन अशांत हो उठता है,  घुटन सी महसूस होती है | विकर्षण उत्पन्न होता है तथा शीघ्रातिशीघ्र उससे दूर जाने की इच्छा होती है| इसके विपरीत किसी-किसी व्यक्ति के समीप जाकर मन शांत होने लगता है, प्रेम तथा आनंद का अनुभव होने लगता है, उसके प्रति आकर्षण जागृत होता है, उसके पास ही बैठे रहने की  इच्छा  होती है | समस्याओं का समाधान मिलने लगता है तथा तनाव से राहत मिलने लगती है | यह संग का अदभुत् प्रभाव है | अतः यदि तनाव से मुक्ति चाहते हैं तो बुरे लोगों का संग छोड़कर भले व्यक्तियों का संग करना चाहिए | ऐसे व्यक्तियों का संग करना चाहिए जो साधक हों | ध्यान-साधना, भक्ति, तप से युक्त हों , सद्गुरु के चरणों में  समर्पित हों, सद्गुरु की शिक्षाओं का अनुपालन करते हों, वही सच्चे तथा हितकारक मित्र हैं,  शुभाकांक्षी हैं | उनका संग तनाव से मुक्ति प्रदान करता है, मन को शांत करता है |
अनेक जन्मों के पुण्यों के फलस्वरूप सद्गुरु की कृपा से किसी सौभाग्यशाली व्यक्ति को सद्गुरु के चरण कमलों का सान्निध्य प्राप्त होता है | ऐसे व्यक्ति का भाग्य जाग जाता है जिसे सद्गुरु सेवा का यह दुर्लभ अवसर व अपनी निकटता प्रदान करते हैं | इससे बढ़कर सौभाग्य नहीं हो सकता | सद्गुरु के सानिन्ध्य में रहकर, उनके दिशा निर्देशन में  सेवा करते – करते साधक  के भीतर के  कल्मष धुलने  लगते हैं | वह पवित्र होने लगता है , सद्गुरु की दिव्य किरणों, तरंगों व उनकी शिक्षाओं को आत्मसात्  करते – करते वह देवत्व की और अग्रसर होने लगता है |

 अतः  जीवन में संग के महत्व को जानने का प्रयास करें तथा तनाव मुक्ति  के लिए अच्छे व्यक्तियों का संग करने का प्रयास करें | 



Friday, 19 February 2016

MEDITATION GURU ARCHNA DIDI

Her Holiness " ARCHNA DIDI " 
  ------ an iministering angel




Her Holiness " ARCHNA DIDI " belongs to the hierarchy of these Enlightened Masters who come on earth from time to time to show us the way to higher realms of conciousness, who pave our way towards contemplation, salvation, realization & liberation. 

Her Holiness is a young, vibrant,energetic, new age visionary with extra ordinary intelligence, charisma & poise. She is divinity personified & love incarnate.

Her spiritual journey began at the tender age of five. Along with her academic studies, she remained engrossed into the depth of inner silence to understand & experience the minute philosophies & practicalities of human life and existence.

Her words are an eclectic mix of her deep profound understanding of ancient scriptures and modern Era's theories. Whosoever has come in the influence of her aura, she has kindled the divine spark in him, she infuses in the minds of seekers a new joy and eternal happiness.