परम श्रद्धेय अर्चना दीदी ---------- एक दिव्य व्यक्तित्व
तेजस्वी मुखकमल , करुणा तथा प्रेम से पूरित नेत्र , होंठोंं पर शिशु सम भोली मुस्कान , अन्तःकरण में पवित्रता तथा सात्विकता का लहराता महासगर वैराग्य तथा ज्ञान की मूर्तिमान् स्वरूप , ध्यान की अतल गहरााइयों के फलस्वरूप रोम - रोम से फूटता स्वर्णीम प्रकाश, स्नेहमयी माँ सम कोमल हृदय की स्वामिनी प्राातः स्मरणीयाा " अर्चना दीदी " मानो उस परम का ही ह्स्ताक्षर हैं | श्वेत परिधान में सुसज्जित श्वेत आत्मा अपनी उपस्थिति मात्र से वातावरण को जीवंत तथा मधुरतापूर्ण कर देती है | उनके आभामंडल की दिव्य तरंगों के घेरे मे जो भी व्यक्ति आता है , वह दिव्य आकर्षण की तरंगों से तरंगित हुए बिना नही रह सकता |
" अर्चना दीदी " की शुभाकांंक्षा है कि जिस पथ की पथिक बनकर उन्होंने अमृतपान किया , उस पथ पर समस्त विश्व अग्रसर हो सके | प्रत्येक मुख पर मुस्कान के फूल खिलेंं, हर चक्षु के अश्रुु धुल जाएँँ, हर हृदय की वीणा पर परम का संगीत गूँँजे, हर दिशा शांति व प्रेम की सुवास से सुवासित हो जाए, हर जीवन पुष्प की भांति खिल सके, यही उनकी मंगल कामना है |
इसी पवित्र परोपकारी भाव की नीव पर दीदी ने ( CELEBERATING LIFE FOUNDATION ) का भव्य मंदिर संंस्थापित किया है | दीदी ने मानव समाज की विभिन्न समस्याओंं, मानवीय संबंधो, व्यक्तिगत समस्याओंं तथा मानसिक व शारिरिक रोगों के मूूलभूूत कारणों व निवारण पर गहन चिन्तन मनन किया है | ध्यान साधना की प्राचीन विधियाँ किस प्रकार आज के मनुष्य के तनाव , अशांति , अवसाद तथा अन्यान्य मनोरोगों की चिकित्सा में लाभकारी सिद्ध हो सकती है तथा किस प्रकार व्यक्ति का सर्वागीण विकास हों सकता है , इस स्न्धर्भ में दीदी ने अनेक नूतन प्रयोग किए तथा अनेक विधियों का अनुसंधान किया | ध्यान , प्राणायाम , योग , विचार , शक्ति आदि विभिन माध्यमोंं से व्यक्ति अपनी प्रत्येक समस्या का समाधान खोज सके, यही दीदी दवा्रा गठित CELEBERATING LIFE FOUNDATION का उद्ध्येश है |
तेजस्वी मुखकमल , करुणा तथा प्रेम से पूरित नेत्र , होंठोंं पर शिशु सम भोली मुस्कान , अन्तःकरण में पवित्रता तथा सात्विकता का लहराता महासगर वैराग्य तथा ज्ञान की मूर्तिमान् स्वरूप , ध्यान की अतल गहरााइयों के फलस्वरूप रोम - रोम से फूटता स्वर्णीम प्रकाश, स्नेहमयी माँ सम कोमल हृदय की स्वामिनी प्राातः स्मरणीयाा " अर्चना दीदी " मानो उस परम का ही ह्स्ताक्षर हैं | श्वेत परिधान में सुसज्जित श्वेत आत्मा अपनी उपस्थिति मात्र से वातावरण को जीवंत तथा मधुरतापूर्ण कर देती है | उनके आभामंडल की दिव्य तरंगों के घेरे मे जो भी व्यक्ति आता है , वह दिव्य आकर्षण की तरंगों से तरंगित हुए बिना नही रह सकता |
" अर्चना दीदी " की शुभाकांंक्षा है कि जिस पथ की पथिक बनकर उन्होंने अमृतपान किया , उस पथ पर समस्त विश्व अग्रसर हो सके | प्रत्येक मुख पर मुस्कान के फूल खिलेंं, हर चक्षु के अश्रुु धुल जाएँँ, हर हृदय की वीणा पर परम का संगीत गूँँजे, हर दिशा शांति व प्रेम की सुवास से सुवासित हो जाए, हर जीवन पुष्प की भांति खिल सके, यही उनकी मंगल कामना है |
इसी पवित्र परोपकारी भाव की नीव पर दीदी ने ( CELEBERATING LIFE FOUNDATION ) का भव्य मंदिर संंस्थापित किया है | दीदी ने मानव समाज की विभिन्न समस्याओंं, मानवीय संबंधो, व्यक्तिगत समस्याओंं तथा मानसिक व शारिरिक रोगों के मूूलभूूत कारणों व निवारण पर गहन चिन्तन मनन किया है | ध्यान साधना की प्राचीन विधियाँ किस प्रकार आज के मनुष्य के तनाव , अशांति , अवसाद तथा अन्यान्य मनोरोगों की चिकित्सा में लाभकारी सिद्ध हो सकती है तथा किस प्रकार व्यक्ति का सर्वागीण विकास हों सकता है , इस स्न्धर्भ में दीदी ने अनेक नूतन प्रयोग किए तथा अनेक विधियों का अनुसंधान किया | ध्यान , प्राणायाम , योग , विचार , शक्ति आदि विभिन माध्यमोंं से व्यक्ति अपनी प्रत्येक समस्या का समाधान खोज सके, यही दीदी दवा्रा गठित CELEBERATING LIFE FOUNDATION का उद्ध्येश है |
















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