Tuesday, 27 May 2025

मूलाधार चक्र साधना

# *दिल्ली में पहली बार* - विशेष दो दिवसीय "मूलाधार #चक्र साधना शिविर"✨✨

*दिनांक: 7-8 जून, 2025 | स्थान: सनातन धर्म मंदिर, लाजपत नगर-3, #दिल्ली*

*#ध्यान गुरु - अर्चना दीदी* के दिव्य सान्निध्य में अनुभव करें—
*शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियों का जागरण!*

 👉🏻 यदि आपको अपने जीवन में नकारात्मकता एवं विभिन्न प्रकार के भय ( Phobias ) का अनुभव होता है ....

👉🏻 यदि आपके जीवन में आत्मविश्वास का अभाव है; उत्साह एवं एकाग्रता का अभाव है; जीवन में सफलता के निकट पहुंचते हुए भी असफल हो जाते हैं ;
तो यह साधना शिविर आपके लिए है‼️

*✅मूलाधार चक्र साधना से लाभ:*
✅आत्मविश्वास में वृद्धि
✅ भावनात्मक संतुलन
✅ भय, चिंता‌ और तनाव से मुक्ति
✅ नकारात्मक एवं अनावश्यक निरंतर सोचते रहने की आदत से मुक्ति
✅ अनिद्रा की समस्या में सुधार
✅आभामंडल का पवित्रीकरण
✅ब्रहमांडीय ऊर्जा व‌ शक्ति से एकीकरण
✅ सौभाग्य एवं समृद्धि
✅सफलता प्राप्ति में बाधाओं से मुक्ति 
✅कुंडलिनी जागरण एवं साधना की आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ

*साधना सत्र का कार्यक्रम:*
*7 जून (शनिवार):* सायं 4:00 - 6:30 बजे
*8 जून (रविवार):* प्रात: 8:00 - 10:30 बजे
 | सायं 4:00 - 6:30 बजे

*स्थान:* *सनातन धर्म मंदिर, लाजपत नगर-3, #दिल्ली*
Google Map Link: https://maps.app.goo.gl/cLtRNJuZ8WtznPcLA?g_st=aw

*सीमित प्रवेश‼️ शीघ्र पंजीकरण करें‌ व अपना स्थान आरक्षित करें*‼️
📞 *8800750750 | 9999303130*

💫 *आइए और अपने भीतर छिपी अनंत शक्तियों को पहचानें—ध्यान गुरु "अर्चना दीदी" के साथ।*

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Friday, 19 July 2024

Guru Purnima Mahotsav


*🪔🪔 इस रविवार, 21 जुलाई- गुरु पूर्णिमा महोत्सव-2024*🪔🪔

🪷🙏 *परम श्रद्धेय "ध्यान गुरु "अर्चना दीदी" के दिव्य सान्निध्य में*🙏🪷

*समय*:  प्रातः 10.00 से 1:00 बजे तक
 
🕉सामूहिक मंत्र जाप
🕉सदगुरु आशीर्वचन
🕉सदगुरु दर्शनम्
🕉सदगुरु आरती
🕉प्रसादम्

*स्थान* :   श्री लक्ष्मी नारायण  सनातन धर्म मंदिर, लाजपत नगर -3, दिल्ली। 
(निकटतम मेट्रो स्टेशन- लाजपत नगर) 

*Google location of Venue*
https://maps.app.goo.gl/71C5n3wHeXJ8TTd46

🌻 *कार्यक्रम के पश्चात सभी के लिए प्रसादम की व्यवस्था की गई है।* 🌻
 
Note:-  *🔴Facebook Live* : दिल्ली से बाहर के साधकों के लिए इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण *11:30 से 12:30 बजे  facebook लाइव* के माध्यम से रहेगा!


🌹गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर परम श्रद्धेय  *ध्यान गुरु "अर्चना दीदी"* के दिव्य दर्शनों एवं आशीर्वचनों का
सौभाग्य लाभ लेने के लिए आप सभी सपरिवार इष्ट मित्रों सहित सादर आमंत्रित हैं।🌹

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid05ofFogWJfDax2NbVV4NPpWpDCd78o8Pd9wMPb23pz7pUAcxyyPmuZg1PZRYxxfwZl&id=100063707259965&sfnsn=wa

Sunday, 20 March 2022

Dhyan Utsav 2022


*INVITATION* 📩

*DHYAN UTSAV - 2022* 🌄

*Sunday 2️⃣7️⃣ March* 
🕔 *05:00 PM (IST)*
🛕 *Arya Auditorium*, *East of Kailash, New Delhi*

*27th March - Auspicious Occasion of Birthday Of Meditation Guru - "ARCHNA DIDI"*

*a day to vibrate the inner soul..*

*a day to rise above all our problems..*

Come. Join us with your family to an Evening of Divinity , Celebration and Meditation.

*Please treat it as a personal invitation!*

Regards 
Team ARCHNA DIDI
+91-8800750750
+91-9999303130

Sunday, 26 December 2021

Yogic Meditation

https://youtu.be/bzElL15eWBo

Yogic Meditation workshop

2021..Lock down
2022..Look within 
Discover health joy n YOU
THIS YEAR...LET THE CHANGE BE WITHIN..

REGISTER  NOW.....
CALL. 8800750750, 9999303130

Monday, 20 December 2021

Yogic Meditation


*What is yogic meditation Workshop about*

In today's changed world where the pandemic has  altered our life and inculcated stress and fear into our lives.... A revolutionary approach is needed where we can go back to our roots and learn the ancient techniques our saints and yogis had prescribed to combat what confronts us today...Based on our sacred literature comes a workshop which aims to change our lifestyle our health ,eradicate stress and bring us into a state of meditation.
_Yogic meditation_ series as devised by *Meditation Guru "Archna Didi"* is made of simple and easy techniques of just a few minutes duration which one can easily inculcate in their daily routine..as simple as  during eating food ,before sleep or even walking

It aims to bring awareness ,a healthy lifestyle and is extremely useful for people who find  it difficult to meditate or follow a routine.

Friday, 26 August 2016

HAPPINESS

*HAPPINESS IS GOD’S MEDICINE TO HEAL YOUR LIFE*
*Message From The Universe For You*

Happiness is your natural state. It is your inner nature that has been gifted to you from birth.

*Happiness* is not just a state of mind, but it is the true elixir of life.

A happier heart can heal a dying body, but a broken spirit can vanish life from even a healthy body.

*HAPPINESS IS THE TRUE MEDICINE CREATED BY GOD.*

Everything in this Universe works with the law of attraction. *The law of attraction* is what you focus and feel the most you attract the most.

The happier you feel, the more success and abundance you will achieve.

The more happiness you cultivate, the more magic you will experience in life.

On the quest to dream, most people live in an illusion. The illusion is delaying their happiness. 

You want to be happy after becoming successful, making more money and having good health.
But, the Universe works in the reverse direction.

When you become happy, you can achieve more success, more money and better health.

Happiness is your medicine to every illness you have in your mind, body and soul.

Are you suffering in any area of life and that it seems impossible to feel happy?

Then start *practicing GRATEFULNESS.*

Yes, GRATEFULNESS is the starting point of your happy life.

No matter where you are living or how broken your life is, you can always find at least one thing to become grateful. If you can find one thing to be grateful, then you can find even ten things. Once you start counting your blessings your life will change magically.

Your sole purpose in life is to feel more and more happy in every moment of life. Once you start being happy everything will fall into place.

As a human, you have the gift to become happy because happiness is God’s medicine to heal your life.

Whenever you become clueless to find *HAPPINESS* find one thing to be grateful for. And then one more and then one more and the list will take care of the rest.

Don’t wait for your dreams to come true to become happy but start becoming happy to make all your dreams come true.

Always remember, Happiness is God’s medicine for every struggle of your life.

*The Universe*





Friday, 20 May 2016

भक्ति --- एक शून्य अवस्था

               भक्ति  --- एक शून्य अवस्था
भक्ति ईश्वर के प्रति तीव्र प्रेम है | ईश्वर प्रेम है और ईश्वर से प्रेम करना उसके लिए जो वह है - भक्ति होती है | भक्ति की कोई दशा नहीं होती है | हमें ईश्वर से कोई शर्त या मांग नहीं करनी चाहिए कि वह हमारी इच्छाओं की पूर्ती उसी तरह करे जिस तरह हम उन्हें पाना चाहते है, अन्यथा हम उसके प्रति सम्मान या प्रेम नहीं रखेंगे।
          भक्ति एक पवित्र भावना होती है | यह विशिष्ट होती है | यह उच्च स्तर की चेतना की ओर भक्त को उन्नत करती है | प्रबल भक्ति सर्वोच्च से स्वयं को समाहित करने की दशा होती है | भक्त उन सब से जुड़ जाता है | जो उसके पास होता है और अपनी आराधना की वस्तु जैसे ईश्वर के लिए कार्य करता है | जीवन में प्रत्येक कार्य उसके प्रिय ईश्वर से जुड़ा होता है | उसके जीवन का सबकुछ एक आराधना और पूजा ईश्वर के प्रति होती है | जब मस्तिष्क स्थिरता पूर्वक एवं लगातार ईश्वर पर केन्द्रित होता है - वह ईश्वर से एकाकार हो जाता है |
    भक्ति विश्वास से आरम्भ होती है | हमें प्रक्रति एवं संसार के आश्चर्य के बारे में सिखाया जाता है और इसलिए हम यह विश्वास रखते हैं कि ईश्वर अच्छा होता है | जैसे ही हम प्रक्रति एवं जीवन के चमत्कारों एवं आश्चर्यों से और अधिक ज्ञान अर्जित करते हैं हमारा विश्वास ईश्वर के प्रति आकर्षित करता है | हम उसकी क्ष्रमताओं के बारे में मंथन करते हैं और उपहार जो वह हम पर बरसाता है और हम उसके प्रति आकर्षित होते हैं |  हम स्वयं को ईश्वर से जुड़ा पाते हैं और हम उससे सर्वोच्च प्रेम से प्यार करते हैं
भक्त और भक्ति                                                                  
भक्त   शब्द अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग मायने रखता है। मंदिरों के दर्शनार्थियों से लेकर घरों में पूजा-आरती और अन्य रीति-रिवाजों का पालन करने वालों को आमतौर पर भक्त कहा जाता है। हो सकता है कि एक भक्त का बाहरी रूप इनमें से किसी तरह का हो, लेकिन एक भक्त की मूल प्रकृति क्या होती है?
भक्त होने का अर्थ किसी चीज की कल्पना करना नहीं है। भक्त होने का मतलब है, आप समझ चुके हैं कि आपके विचार, आपकी कल्पना, आपकी याद्दाश्त इस जगत में किसी काम की नहीं। भक्त होने का मतलब किसी मतिभ्रम का शिकार होना भी नहीं हैशिक्षा का मतलब सर्टिफिकेट हासिल करना नहीं है। इसका मतलब खुद का विकास करना है।
जब मैं भक्ति कहता हूं तो मैं ईश्वर के बारे में बात नहीं कर रहा हूं। मैं आपके शून्य हो जाने के बारे में बात कर रहा हूं। अगर आप शून्य की अवस्था में आ जाते हैं तो आप हर चीज को अपने भीतर समा सकते हैं, क्योंकि हर चीज शून्य में समा सकती है।
भक्त होने का मतलब किसी मतिभ्रम का शिकार होना भी नहीं है। भक्त होने का मतलब है कि वह अपने खुद के विचारों को, अपनी भावनाओं को कोई महत्व नहीं देता, क्योंकि वह जानता है कि वह कुछ भी नहीं है। वह किसी काम का नहीं है।इस जगत में हर चीज शून्य में ही समाई हुई है। जब आप शून्य हो जाते हैं तो आप हर चीज को अपने भीतर समा सकते हैं। तो भक्ति का अर्थ बस यही है।
यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हमने एक ऐसे समाज का निर्माण किया है जहां विचार को ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। देखा जाए तो यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है। विचार तो बहुत छोटी सी घटना है। विचार तो आपकी एकत्र की हुई स्मृति से ही लगातार अपना भोजन ले रहे होते हैं। और जो कुछ भी आपने एकत्र किया है, वह चाहे जितना भी बड़ा हो, भले ही पूरा विश्व ज्ञान कोष अपने दिमाग में इकठ्ठा कर लिया हो, फिर भी यह बहुत छोटा है और आपके सभी विचार उस क्षुद्रता से आ रहे हैं जिसे आप ज्ञान कहते हैं।
भक्ति बस एक सहज बोध है
एक भक्त को बेशक किसी चीज को अलंकृत करना नहीं आता हो, लेकिन वह जानता है कि वह क्या है और यही जानना उसके लिए काफी है। चूंकि वह जानता है कि वह क्या है इसीलिए वह इतना खूबसूरत इंसान बन गया है, इतना जबर्दस्त आनंदमय प्राणी बन गया है, उसे अपने भीतर संगीत महसूस होता है, शानदार नृत्य महसूस होता है, क्योंकि उसके पास जीवन का बोध है, अहसास है। उसे इसे समझने की परवाह नहीं, क्योंकि वह इसकी विशालता को देख लेता है। वह अपने अस्तित्व की तुच्छ प्रकृति को भी देखता है। उसने इसे स्पर्श किया है, इसीलिए वह इतना पवित्र और भाग्यवान नजर आता है, इसलिए नहीं कि उसने सब कुछ जान लिया है। वह जानने की ज्यादा चिंता नहीं करता, क्योंकि वह भक्त है।
भक्ति और नम्रता
नम्रता भक्ति के लिए बहुत आवश्यक है।
सबमे प्रभु हैं ये बात संतो के श्री मुख से उपदेश सुन-सुनकर जब ह्रदय में बैठ जायेगी तब किसी के प्रति कठोरता हम कर ही नहीं पाएंगे। प्रभु को सहजता, सरलता, निर्मलता और नम्रता विशेष प्रिय है।नम्र और विनम्र व्यक्ति के प्रति तो दुनिया में भी सब सदभाव रखते हैं। व्यक्ति जितना गुणवान होगा उतना ही विनम्रवान भी होगा। ज्ञान सरलता की ओर ही ले जाता है। जो अकड़ पैदा करे वो तोअज्ञान है। नम्रता एक ऐसा दुर्लभ गुण है , जिसे हमें अपने जीवन में धारण करना है। नम्रता का अर्थ ऐसे भाव से जीना है कि हम सब एक ही परमात्मा की संतान हैं। जब हमें यह अहसास होता है कि प्रभु की नजरों में सब एक समान हैं , तो दूसरों के प्रति हमारा व्यवहार नम्र हो जाता है। जब हमारा अहंकार खत्म हो जाता है तो हमारा घमंड और गर्व मिट जाता है। तब हम किसी को पीड़ा नहीं पहुंचाते। हम महसूस करते हैं कि प्रभु की दया से हमें कुछ उपहार मिले हैं और जो पदार्थ हमें दूसरों से अलग करते हैं , वे भी प्रभु के दिए उपहार हैं। अपने भीतर प्रभु का प्रेम अनुभव करने से हमारे अंदर नम्रता आती है। तब हर चीज में हमें प्रभु का हाथ नजर आता है। हम देखते हैं कि करनहार तो प्रभु हैं। इस तरह की आत्मिक नम्रता धारण करने से , धन , मान , प्रतिष्ठा , ज्ञान और सत्ता का अहंकार हमें सताता नहीं है। कहा जाता है कि जहां प्रेम है , वहां नम्रता है। हम जिनसे प्यार करते हैं , उन पर अपना रोब नहीं डालते और न ही उन पर क्रोध करते हैं। हमें उन लोगों के प्रति भी इसी तरह का व्यवहार करना चाहिए , जिनसे हम अपरिचित हैं। यह भी कहा जाता है कि जहां प्यार है , वहां नि : स्वार्थ सेवा का भाव होता है। हम जिनसे प्रेम करते हैं , उनकी सहायता करते हैं। क्योंकि सब में प्रभु की ज्योति निवास करती है।
भक्ति और सेवा       
     
  भक्ति शब्दों की रूप रचना भी उसके गहन और व्यापक स्वरूप को प्रकट करती है। भज्‌-सेवायाम्‌ धातु से क्तिन्‌ प्रत्यय होकर भक्ति शब्द बना है। मूल अर्थ है सेवा, सेवा का संबंध कर्म से है। मन में प्रेमाभक्ति हो तो कर्म में सेवाभक्ति की भावना स्वयं जाग जाएगी। मन प्रभु के नाम को जपता है तो तन सेवा भक्ति, कर्म में रत हो जाता है। चिंतन, मनन, भजन में सेवा नहीं रह सकती। सेवा का संबंध उन कर्मों से है जो अपने प्रिय प्रभु के लिए किए जाते हैं। कर्म करो और भगवान को अर्पित कर दो, अर्थात्‌ प्रत्येक कार्य को करते हुए मन में भावना बननी चाहिए कि मैं जो कर रहा हूं वह सब मेरे भगवान की सेवा भक्ति के निमित्त है।
सेवा संबंधी प्रत्येक कर्म को भगवान को समर्पित करने से प्राणी अहंकार से मुक्त हो जाता है। जो कुछ है उसका है, जो उसका है उसको समर्पित करो।
        ध्यान गुरु अर्चना दीदी कहती हैं
            सेवा का फ़ल: गुरू की कृपा       
                
सेवा मे बहुत आनंद है। सेवा का दूसरा नाम है हनुमान 🌹🌹।
हनुमान जी ने सेवा करके ही तो पाया अपने राम को। हनुमान जी के अतिरिक्त सेवा का दुसरा पर्याय संसार मे हो नही सकता। सेवा का अभिप्राय एक ही शब्द है हनुमान। हनुमान जी का रूप क्या है। हनु कहते है मारने को और मान का मतलब मान ,जिन्होने अपने मन को मार दिया हो। जो अपने मान को मार के सेवा मे लग गये हो वही तो सच्चा सेवक होते है।मन प्रभु के नाम को जपता है तो तन सेवा भक्ति, कर्म में रत हो जाता है। चिंतन, मनन, भजन में सेवा नहीं रह सकती। सेवा का संबंध उन कर्मों से है जो अपने प्रिय प्रभु के लिए किए जाते हैं। कर्म करो और भगवान को अर्पित कर दो, अर्थात्‌ प्रत्येक कार्य को करते हुए मन में भावना बननी चाहिए कि मैं जो कर रहा हूं वह सब मेरे भगवान की सेवा भक्ति के निमित्त है ।
भक्ति और श्रेष्ठता 
                            
हममें से हर एक के भीतर एक राजा है , हर एक व्यक्ति महत्वपूर्ण है और हम सबके भीतर आत्मा है जो कि परमात्मा का अंश है। जब हम इस दृष्टि से अपने सभी कार्य करते हैं कि हमें हर व्यक्ति को अपना सर्वश्रेष्ठ देना है , तब हम हर एक के अंदर बैठे परमात्मा को सम्मान देते हैं।
हे प्यारे प्रभु हम अपनी श्रेष्ठता को प्राप्त कर सके!
हे दयालु! हे कृपालु! हे परमेश्वर! हे ज्योतिर्मय! हे ज्ञानस्वरूप!
चरण-शरण में उपस्थित होकर हम आपके बच्चे आपसे प्रार्थना करते हैं!हमारा यह जीवन आपका दिया हुआ एक वरदान है!
श्रेष्ठ से श्रेष्ठ कर्म करने के लिए और जिंदगी की श्रेष्ठता को प्रकट करने के लिए इस संसार के कर्मक्षेत्र में हम लोग आए हैं!
हमारी बुद्धि अपनी श्रेष्टता को उपलब्ध हो! हमारे ह्रदय का प्रेम श्रेष्ठता तक पहुंचे!हमारे कर्म श्रेष्ठता से युक्त हों। हमारी आत्मा ऊंचाई को, महानता को विशेषता को प्राप्त हो सके! हम अपने अंदर के श्रेष्ठ तत्वों को बाहर निकाल सकें!जो कुछ दुनिया में करने के लिए जो क्षमताएं भगवान जी आपने हम को दी उन सभी क्षमताओं के सामर्थ्य का हम पूर्ण प्रयोग कर सकें!
इस जीवन का पूर्ण लाभ ले सकें हमें वो अवसर दीजिए, प्रेरणा और शक्ति दीजिए। हम अपने विकास तक पहुंचे,ऊंचाई तक पहुंचे! हम संसार की उलझनों में, दुखों में उलझ कर न रह जाएं!उनके पार जाएं,अपना उद्धार करें और जो पिछड़ गए हैं उनका भी हाथ पकड़ कर आगे लेकर जा सकें!हे प्यारे प्रभु इतनी कृपा जरूर करना कि हम अपने सतगुरु के बताये मार्ग पर चल सके!हमें आशीर्वाद दें!अपनी भक्ति, अपनी कृपा, अपने आशीर्वाद हमें प्रदान करें!यही विनती है प्रभु!
*ऊँ शान्तिः! शान्तिः!! शान्तिः!!!ॐ!सादर हरि ॐ जी!*